Bhajan - भक्ति में तेरी जीवन सँवार दूं

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चाह ये कि कोई चाह ना रहे
कर्म ऐसा हो, कोई आह ना रहे
ऐसे कृपा हो कि मैं, मैं को त्याग दूं
ना घमंड, ना अहम, भक्ति में तेरी जीवन सँवार दूं


कर्म करूं, फल की इच्छा ना हो
पाखंड नहीं, धर्म मेरा सच्चा हो
ऐसे कृपा हो कि मैं, मैं को त्याग दूं
ना घमंड, ना अहम, भक्ति में तेरी जीवन सँवार दूं

तुझमें सबको देखूँ, सबमें तुझको
तुझमें रमने की धुन हो मुझको
ऐसे कृपा हो कि मैं, मैं को त्याग दूं
ना घमंड, ना अहम, भक्ति में तेरी जीवन सँवार दूं

रहे तेरा ध्यान हर पल हर घड़ी
खोल दूँ तेरे चरणों में मन की हर कड़ी
ऐसे कृपा हो कि मैं, मैं को त्याग दूं
ना घमंड, ना अहम, भक्ति में तेरी जीवन सँवार दूं

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